चिली, आलू के साथ फ्रेन्ड्शिप तोड़कर चला गया। सभी आलू से पूछते हैं कि चिली के ऐसे व्यवहार के बाद भी तुम चिली के बेस्ट फ्रेन्ड क्यों बने रहना चाहते हो ? तब आलू अपने बचपन की बात बताता है। सब लोग आलू को ‘रंगीन रोतलूं’ कहकर चिढ़ाते थे। चिली ने आलू को सिखाया था कि जब कोई उसे चिढ़ाए तो उसे एक बड़ी स्माइल देना। जब स्केटिंग रिंग पर सब आलू को चिढ़ाएँगे तो क्या वह स्माइल दे पाएगा?
जैसे ही मैंने पैरों में स्केट्स पहने, सभी हाथी के बच्चे मुझे ‘रंगीन रोतलूं’ ‘रंगीन रोतलूं’ कहने लगे।

मुझे फिर से डर लगा, अकेलापन महसूस हुआ। तभी ज़ू...म... करता हुआ चिली उड़कर मेरे पास आया और बोला, ‘अरे! रंगीन चल्लू ने जो सिखाया, वो इतनी जल्दी भूल गया? स्माइल...!’ और फिर सभी हाथी के बच्चों से जोर से कहा, ‘शीश...शीश... तुम सब अपना नाम बताओ। मुझे अपनी नोटबुक में तुम्हारा नाम लिखना है। जब मैं बेस्ट सिंगर बनूँगा तो तुम में से किसी को अपना ऑटोग्राफ नहीं दूँगा। तुम मेरे बेस्ट फ्रेन्ड को परेशान करतो हो न!’ बोलो, अभी तो वह सिंगर भी नहीं बना था लेकिन उसका रौब विनर जैसा था। उसकी बात सुनकर मुझे हँसी आ गई।
मुझे हँसता हुआ देखकर वह जोर से चिल्लाया, ‘रंगीन रोतलूं! तुम तो जल्दी सीख गए...’ यह सुनकर मेरे चेहरे पर और बड़ी स्माइल आ गई।

उस स्माइल ने मैजिक कर दिया। जब भी वे लोग मुझे चिढ़ाते तो मैं स्माइल करता। इसलिए अब उन्हें मुझे ‘रंगीन रोतलूं’ कहकर चिढ़ाने में मज़ा आना बंद हो गया। कुछ ही दिनों में उन्होंने मुझे चिढ़ाना बंद कर दिया। बस, उसके बाद मैं और चिली कभी अलग नहीं हुए।

पार्सली, जो अभी तक चिली से गुस्सा था वह कहने लगा, ‘तुम लोगों को किसी को पता नहीं है, मेरा चिली भाई तो वर्ल्ड का बेस्ट भाई है।’
मैंने पार्सली से कहा, ‘कुछ भी हो जाए, मैं और चिली कभी अलग नहीं होंगे। चलो, हम उसे ढूँढ़ निकालें।’
हम सब चिली को जंगल में ढूँढ़ने निकल पड़े। पार्सली आगे-आगे उड़ गया। सबसे पहले हम तालाब पर गए। वह वहाँ पर नहीं था। स्कूल गए, वहाँ भी नहीं था। फिर हम चिली के घर गए। वह वहाँ पर भी नहीं था। चिली की मम्मी भी हमारी बातें सुनकर चिली को ढूँढ़ने निकलीं। फिर मुझे याद आया कि वह ज़रूर ही नदी पर गया होगा। वही नदी, जहाँ हम बेस्ट फ्रेन्ड बने थे। जैसे-जैसे नदी नज़दीक आती गई, मेरा विश्वास बढ़ता गया कि चिली यहीं पर होगा। तभी मुझे नदी में से आवाज़ सुनाई दी। मैं खुश हो गया कि चिली मिल गया। मैं दौड़कर आगे गया।
देखा तो पार्सली नदी में तैर रहा था। पार्सली को देखकर पहली बार मुझे गुस्सा आ गया। मैंने उसे गुस्से से पूछा, ‘पार्सली, तुम चिली को ढूँढ़ने के बजाय यह क्या कर रहे हो?’





