आलू-चिली - चैप्टर-२१

  पूरे जंगल में चिली को ढूँढ़ने के बाद आलू हारकर घर लौटता है। फिर आलू को चिली अपने ही घर पर मिलता है। आलू के सारे लड्डू खाकर आलू के ही रूम में वह चैन से सो रहा है। अब आगे...

      माँ ये क्या कह रही है? चिली यहाँ है!

      मैं दौड़कर अंदर गया और देखा तो वह सच में मेरे बिस्तर पर ही था।      यहाँ मेरी नींद और भूख सब मर चूके थे और वह मेरे ही पलंग पर चैन से सौ रहा था! लेकिन मुझे चिली मिल गया। उसे देखकर मैं इतना खुश हुआ कि मैं जाकर उसके ऊपर ज़ोर से कूदा।

      ‘ओ मम्मी, मेरा पेट दब गया।’ कहते हुए वह उठ गया और बोला, ‘मुझे तुमसे बात नहीं करनी। तुम यहाँ से चले जाओ!’

      मैंने उससे कहा, ‘तुम मेरे घर में हो। तुम्हें मुझसे बात नहीं करनी है तो यहाँ क्या कर रहे हो?’ उसने मुझसे कहा, ‘मैं पार्सली का चेहरा नहीं देखना चाहता था इसलिए घर नहीं गया। और मुझे भूख लगी थी इसलिए मैं खाने आया था और खाने के बाद कब नींद आ गई यह पता ही नहीं चला!’फिर पता नहीं क्या हुआ कि वह फिर से चुप हो गया और उसकी आँखों में आँसू आ गए। मैं उसके पास बैठ गया और उससे पूछा, ‘चिली, क्या सोच रहे हो?’

तो आँखों में आँसू लिए उसने कहा, ‘आलू मैं हार गया। वह भी कोको से। मैं वर्ल्ड का बेस्ट सिंगर बनना चाहता था लेकिन मैं तो जंगल का बेस्ट सिंगर भी नहीं बन पाया?’

फिर अचानक बेचैन होकर बोला, ‘यह सब कोको के कारण हुआ है। उसने तुम्हारी और मेरी फ्रेन्ड्शिप तोड़ दी और इसलिए मैंने सॉन्ग बदल दिया और इसलिए मैं हार गया।’अब वह लाल होने लगा था ‘ये कोको... पता नहीं अपने आप को क्या समझता है! कुछ आता-जाता नहीं है। मुझे तो लगता है उसने जज की भी चापलूसी (बटरींग) की होगी! और तुम भी क्या कोको-कोको कर रहे थे! तुम्हारा बेस्ट फ्रेन्ड तो मैं हूँ! तो तुम कोको से ऐसा कैसे कह सकते हो कि वो ही जीतेगा!’ कहते हुए उसने मुझे ज़ोर से चोंच मारी। ‘आ...ह’ मैं कुछ कह पाता उससे पहले ही वह रूम में गोल-गोल चक्कर लगाने लगा और कहने लगा, ‘आलू, मुझे फिर से सब गरम-गरम लग रहा है। मुझे क्या हो रहा है?! मेरे पंख जल जाएँगे। आलू, कुछ करो कि ये बंद हो जाए।’

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