आलू-चिली - चैप्टर-२६

आलू ने चिली को टाको और ब्राउनी की स्टोरी सुनाई, जिससे चिली को समझ आया कि किस तरह ईर्ष्या के कारण ब्राउनी ने सब कुछ खो दिया और ऐसी ही ईर्ष्या चिली को कोको से होती थी।

आलू की बात सुनकर चिली की आँख और नाक से पानी बहने लगा। वह आलू के कंधे पर नाक पोंछ रहा था। तभी आलू को अपने दूसरे कंधे पर भी कुछ चिपचिपा-सा महसूस हुआ। मुड़कर देखा तो पार्सली सुबक-सुबक कर रो रहा था। 'आलू भाई, मेले भाई के फेफड़ों से खून न नितले उसके लिए आपने तितना कुछ तिया!' उसकी बात सुनकर आलू-चिली समझ नहीं पाए कि वे हँसे या रोएँ।

चिली को अपने पूरे शरीर में लगी आग का रहस्य मिल गया था। जब-जब कोई कोको की प्रशंसा करता या उसे ऐसा लगता कि कोको उससे बेहतर कर रहा है, तब-तब उसके शरीर में जलन होती थी। वह भूल ही गया था कि उसे सिंगिंग पसंद है। इस ईर्ष्या के कारण उसकी सबसे पसंदीदा चीज़ ही उसे खुशी नहीं दे रही थी। वह भी ब्राउनी की तरह ही किसी अदृश्य रेस में दौड़ रहा था और हाँफ रहा था। ब्राउनी को हुए नुकसान के बारे में सोचकर ही उसके रोंगटे खड़े हो गए। लेकिन साथ ही साथ उसे खुशी भी हुई कि उसके बेस्ट फ्रेन्ड आलू ने उसे इस ईर्ष्या की आग से निकालने के लिए इतनी मेहनत की। यह कितनी सुंदर फ्रेन्डशिप है जिसमें चिली का नुकसान न हो इसलिए आलू उसके विरुद्ध जाने को रेडी था, लेकिन उसकी गलत बात में साथ देने के लिए ज़रा भी रेडी नहीं था! लेकिन उसे अंदर अभी भी कुछ चुभ रहा था, खटक रहा था। मानो आलू उसका कन्फ्यूज़न समझ गया हो, वैसे बोला, ‘पूछ लो, चिली!’

'थैंक यू, आलू! अब मुझे समझ आया कि तुम क्यों मुझसे ऐसा कहते थे कि मैं जीतूँ या हारूँ पर मैं बेस्ट ही रहूँगा! लेकिन, जैसे कि कोको तुम्हारी बेस्ट फ्रेन्ड हो वैसे हर बात में तुम उसका साथ क्यों देते थे? तुम क्यों उसके लिए भी चिली शेक लेकर आए थे? तुम कॉम्पिटिशन में मेरे बदले उसकी साइड क्यों ले रहा थे?' चिली की आँखों में शिकायत झलक रही थी।

आलू इतने दिनों से जो बात कहने का प्रयत्न कर रहा था, वह बात अब चिली सुनने के लिए तैयार हुआ था। आलू ने चिली को एक सैड स्माइल दी और कहा, ‘तुम्हें याद है? जब मैं स्केटिंग कॉम्पिटिशन पूरा करके तुम्हारे पास आया और हमने तय किया कि हम नेक्स्ट डे साथ में रियाज़ करेंगे? मैं तुम्हारे घर से निकलकर तुम्हारे लिए चिली शेक लेने थीओ के कैफे गया। मैंने तुम्हारे लिए

चिली शेक खरीदा और तभी मुझे कुछ आवाज़ सुनाई दी। कोई दिखाई नहीं दे रहा था। सिर्फ ऐसा लगा कि दूर अंधेरे में कोई रो रहा है। रोने की आवाज़ सुनते ही थीओ ने एक आह भरी और जिफ्फी की आँखों में आँसू आ गए। मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आया।’

‘भूत... भूत था न आलू भाई? मुझे बेज़िल कह रही थी कि वहाँ बरगद के पेड़ में एक भूत रहता है, जो रात को थियो के कैफे से चिली शेक ले जाता है और फिर उसे तीखा लगता है इसलिए रोता है! पर उसे तीखा लगता है तो उसे चिली शेक पीना ही नहीं चाहिए न!’, हमेशा की तरह आत्मविश्वास के साथ पार्सली बोला।

 

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