आलू, चिली से टाको घोड़े के बारे में बात करता है, जिसका सपना रेसकोर्स में हिस्सा लेने का था। जो बहुत मेहनत करके रेसकोर्स में हिस्सा लेने जाता है और वहाँ ब्राउनी उसका बेस्ट फ्रेन्ड बन जाता है। लेकिन इस रेस में कुछ ऐसा होता है जिससे टाको रेस और ब्राउनी दोनों को खो देता है। चलो हम आलू से सुनते हैं कि रेस में क्या होता है?
जब-जब टाको और ब्राउनी प्रैक्टिस करते थे, तब-तब टाको मस्ती में ब्राउनी से कहता, ‘ब्राउनी तुम जीतोगे तो मैं तुम्हें अपने जंगल में ले जाऊँगा। और वहाँ तुम्हें एक बड़ी पार्टी दूँगा। और अगर मैं जीता तो?’ तो ब्राउनी कहता, ‘जीतूँगा तो मैं ही!’ हर बार यह सुनकर टाको को ब्राउनी का आत्मविश्वास बहुत पसंद आता था। बहुत बाद में पता चला कि यह उसका आत्मविश्वास नहीं, बल्कि कुछ और ही था।
रेस के दिन जब टाको और ब्राउनी दोनों साथ-साथ खड़े थे तो टाको ने कहा, ‘ब्राउनी मुझे थोड़ा डर लग रहा है।’ ब्राउनी ने ऐसे जवाब दिया, मानो उसकी बात सुनी ही न हो, ‘आज तो ट्रॉफी मेरी ही होगी, जीतूँगा तो मैं ही !’ टाको उसे देखता ही रहा, वह आगे कुछ बोले, तभी ट्रैक के दरवाजे खुल गए। और बाहर से लोगों की आवाज़ें आने लगीं।
यह सुनते ही टाको के डर की जगह उसके उत्साह ने ले ली। उसने दौड़ना शुरू किया। ऊपर नीला आकाश, नीचे गीली मीट्टी और साइड में बैठे लोगों के चिल्लाहट और उत्साह, यह सब उसने टीवी पर कई बार देखा था। इसी के लिए तो वह यहाँ आया था। उसके उत्साह के साथ उसकी स्पीड भी बढ़ती गई। धीरे-धीरे वह बाकी सभी घोड़ो से आगे निकल गया।
टाको अपनी ही मस्ती में दौड़ रहा था, तभी ‘जीतूँगा तो मैं ही!’ उसे पीछे से ब्राउनी की आवाज सुनाई दी। उसने थोड़ा धीमा होकर देखा तो ब्राउनी पूरे जुनून के साथ दौड़कर आ रहा था। उसकी आँखों में खुन्नस साफ झलक रही थी। मानो उसे टाको दिख ही नहीं रहा था। उसने फिर से कहा, ‘जीतूँगा तो मैं ही!’ टाको और धीमा हो गया। ब्राउनी उसके पास आ पहुँचा। उसके पास में आते ही टाको को ऐसा लगा मानो गरम आग को छू लिया हो। उसने ब्राउनी को हाँफते हुए देखा तो कहा ‘ब्राउनी, धीरे दौड़ो। तुम्हारी साँस फुल गई है।’ ‘जीतूँगा तो मैं ही!’ कहकर ब्राउनी ने अपनी स्पीड बढ़ाई। उसकी साँसे इतनी तेज चल रही थीं कि टाको रेस को भूल गया और उसे उसकी चिंता होने लगी। उसने ज़ोर से कहा, ‘ब्राउनी, धीरे... तुम गिर जाओगे।’ उसकी बात सुनकर ब्राउनी ने पीछे मुड़कर देखा और फिर उसी खुन्नस के साथ उसने टाको को देखा और बोला, तुम्हें नहीं जीतने दूँगा, जीतूँगा तो मैं ही। और उसने अपनी स्पीड और ज्यादा बढ़ा दी। उसका चेहरा और गुस्सा देखकर टाको रेसकोर्स के बीच में ही खड़ा हो गया और दूर जाते ब्राउनी को देखता रहा। मानो ब्राउनी नहीं, उनकी दोस्ती भी दूर जा रही थी।
टाको ने फिर से फुल स्पीड में दौड़ना शुरू किया। वह फिनिश लाइन के पास पहुँचा और उसने देखा कि ब्राउनी ने फिनिश लाइन क्रॉस कर ली है। वह मुड़ा और हाँफते हुए बोला, ‘टाको, मैंने तुम्हें हरा दिया। तुम्हें क्या लगा था, मैं एक छोटे से जंगल के घोड़े से हार जाऊँगा?’ और फिर धड़ाम से जमीन पर गिर पड़ा। टाको दौड़कर उसके पास गया। ब्राउनी बेहोश हो गया था।
उसे तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया। डॉक्टर ने कहा कि स्पीड से दौड़ने के कारण उसके दोनों पैर फ्रैक्चर हो गए थे। इतनी ही नहीं, उसके फेफड़ों में ब्लीडिंग हुई थी। अगर वह और दो मिनिट इसी तरह दौड़ता तो शायद वह अपनी जान गँवा बैठता।
यह सोचकर ही टाको की आँखों में आँसू आ गए। एक ही विचार उसे सता रहा था, ‘क्या जीतना जीने से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है?’ उसे लग रहा था कि ‘शुक्र है, मेरा फ्रेन्ड बच गया।’ उसे पता नहीं था कि उसका बेस्ट फ्रेन्ड बच गया है लेकिन अब वह उसका बेस्ट फ्रेन्ड नहीं रहा।




