आलू-चिली - चैप्टर-२७

चिली को यह समझ में नहीं आ रहा था कि आलू क्यों कोको की साइड लेता था। इसके पीछे की वजह बताते हुए आलू उस समय की बात करता है जब वह थीओ के कैफे गया था और उसे अंधेरे में किसी पेड़ से आवाज़ आती हुई सुनाई दी थी। पार्सली का मानना है कि उस पेड़ में कोई भूत है।

‘पार्सली, जंगल में कोई भूत नहीं है। तुम और बेज़िल यह झूठी अफवाहें फैलाना बंद करो!’ चिली ने चिढ़ते हुए कहा।

आलू ने मानो पार्सली की बात सुनी ही न हो वैसे बोला, ‘चिली, कोको रो रही थी। वह फूट-फूट कर रो रही थी। जब तुम बहुत छोटे थे, तब मुझे तालाब पर रोता हुआ देखकर तुम समझ गए थे कि मुझे क्या हो रहा है। तुम ऐसे थे, जो बना शब्दों के ही दूसरों का दुःख समझ जाते थे। चिली, यह ईर्ष्या कैसी है! कोको के इतने शब्दों को सुनने के बाद थीओ और जिफ्फी जो समझ गए, वह तुम्हें समझ नहीं आया!’ आलू दुःखी होकर बोला।

चिली इस बात से एकदम कन्फ्यूज़ हो गया। और पार्सली ने जोर-जोर से रोते हुए बोलना शुरू किया, ‘टोटो... उसकी बब्बी और उसकी बेस्त फलेन्ड उससे दूल हैं, इसलिए उसे अतेला लगता है... ’ दो मिनट पहले वह भूत की बात कर रहा था और अब रोने लगा। और रोते-रोते पार्सली क्या बोल रहा है, यह किसी को समझ नहीं आया।

आलू का एक हाथ पार्सली की नाक से बहने वाले पानी से इतना चिपचिपा हो गया था कि उससे चिट्ठी चिपकाने के लिए गोंद की एक बॉटल भरी जा सकती थी।

चिली ने आलू की तरफ देखा और धीरे से बोला, ‘कोको क्यों रो रही थी?’

आलू ने पार्सले को उठाकर खिड़की पर बिठाया और बोला, ‘तुम्हें कोको का सॉन्ग याद है?’

 ‘यह फ्रेन्ड्शिप क्या है? कोको अकेली घूमती है, कब मुझसे सब खुश होंगे? मन में यह सवाल करती है।’

‘पर वह कहाँ अकेली है?’ चिली तुरंत बोला।

‘मुझे भी नहीं पता था कि वह कितनी अकेली है। थीओ ने मुझे बताया कि कोको हर रात वहाँ जाकर रोती है। तुम लोगों के कॉम्पिटिशन से एक वीक पहले कोको की मम्मी को उसे यहाँ छोड़कर शहर जाना पड़ा। क्योंकि उन्हें वहाँ के एक बड़े स्कूल में सिंगिंग टीचर की जॉब मिल गई। इतना ही नहीं, उसकी बेस्ट फ्रेन्ड कॉफी को भी उस स्कूल में ऐडमिशन मिल गया इसलिए वह भी चली गई। कोको भी उनके साथ जाने वाली थी। लेकिन वह एन्ट्रेन्स एग्ज़ाम में पास नहीं हो सकी। इसलिए वह बिल्कुल अकेली हो गई। अब तुम मेरे बेस्ट फ्रेन्ड चिली बनकर सोचो कि कोको के मन में क्या चल रहा होगा।’

‘उसे अकेला महसूस होता होगा। लगता होगा कि मेरा कोई फ्रेन्ड नहीं है, मेरी मम्मी मुझे लव नहीं करेगी, क्योंकि मैं उनके जितना अच्छा नहीं गाती। कॉफी भी अब नए बेस्ट फ्रेन्ड्स बना लेगी! उसका आत्मविश्वास तो बिल्कुल टूट ही गया होगा।’ चिली मानो कोको बन गया हो, उतनी सहजता से बोल रहा था। उसकी बात सुनकर आलू के चेहरे पर एक छोटी सी स्माइल आ गई। उसे पता चल गया कि यह उसका वही बेस्ट फ्रेन्ड है, जो हमेशा खुद को दूसरों की जगह रखकर उनका दुःख समझ लेता है।

‘चिली, उसे इस तरह अकेले रोते देखकर मुझे बहुत दुःख हुआ। मुझे याद आया कि जब सब मुझे चिढ़ाते थे तब मुझे कितना अकेला महसूस होता था। और तब तुम किस तरह मेरे फ्रेन्ड बनने आए थे। मुझे लगा, जिस तरह चिली ने मेरा दोस्त बनकर मेरी सैडनेस दूर की थी, वैसे ही मैं भी कोको की सैडनेस दूर कर दूँगा। और बस, इसीलिए मैंने उस दिन एक के बदले दो चिली शेक लिए। एक तुम्हारे लिए और दूसरा कोको के लिए! क्योंकि मुझे कोको से कहना था कि वह अकेली नहीं है!’

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